नई दिल्ली….

आप UPI में जिस तरह स्कैन कर पेमेंट करते है, उसी तरह आधार डिटेल्स शेयर कर सकते हैं। एप को ज्यादा सिक्योर बनाने के लिए इसमें फेस ऑथेंटिकेशन, बायोमेट्रिक लॉक जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं।
नया एप पुराने एम आधार एप को रिप्लेस नहीं करता, बल्कि उसके साथ काम करता है। मतलब, कुछ काम के लिए पुराने वाले एप का ही इस्तेमाल करना होगा, कुछ के लिए नया।

आधार के नए एप के फीचर्स….
- फोन में आधार कैरी करें: ई-आधार हमेशा साथ रहेगा, पेपर कॉपी की जरूरत नहीं होगी।
- फेस स्कैन शेयरिंग: ID शेयर करने के लिए फेस स्कैन करना होगा, पिन-OTP की तरह सेफ।
- सिक्योर लॉगिन: बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से एप ओपन होगा।
- मल्टी लैंग्वेज सपोर्ट: हिंदी, इंग्लिश सहित कई भाषाओं में अवेलेबल।
- ऑफलाइन यूज: इंटरनेट नहीं होने पर भी आधार देख सकेंगे।
पुराना आधार एप पहले से था, फिर नया क्यों लाया गया…?
पुराना mAadhaar और नया आधार एप का मकसद आधार को डिजिटल तरीके से यूज करना है, लेकिन फोकस अलग-अलग है…
- PDF डाउनलोड या PVC कार्ड के लिए अभी भी mAadhaar यूज करें।
- वर्चुअल ID जेनरेट या कुछ अपडेट्स के लिए UIDAI पोर्टल या mAadhaar ही बेहतर।
- नया एप प्राइवेसी-फर्स्ट है, जहां सिलेक्टिव डिस्क्लोजर से सिर्फ जरूरी इंफो शेयर होती है।
नए एप से यूजर्स को क्या फायदा मिलेगा…?
- होटल चेक-इन, SIM एक्टिवेशन या बैंक KYC तेज होगी।
- फैमिली मैनेजमेंट आसान, एक फोन पर सबके डिटेल्स।
- सिलेक्टिव शेयरिंग से पर्सनल डेटा एक्सपोज नहीं होगा।
2009 में शुरू हुआ था आधार….
आधार 2009 में शुरू हुआ था। अब 1.3 अरब यानी 130 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास आधार हैं। पहले पेपर कार्ड था, फिर mAadhaar एप आया। अब डिजिटल इंडिया के तहत फुली डिजिटल एप लाया गया है। सरकार की कोशिश है कि हर सर्विस ऑनलाइन हो जाए।













