धार….
ग्रामीण स्तर पर नल -जल योजना के प्रभावी संचालन, रखरखाव और पेयजल स्रोतों के स्थायित्व को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वाटरएड इंडिया द्वारा होटल देव रेसीडेंसी में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मे धार जिले के ब्लाक धार, नालछा एवं तिरला विकासखंड की 20 ग्राम पंचायतों के 60 ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को नल-जल योजना के सफल संचालन के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी । इसमें पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने, पाइपलाइन की नियमित देखरेख, मोटर एवं स्टोरेज टैंक की सफाई, तथा जल स्रोतों की स्थायित्व सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया । साथ ही, सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाने और ग्राम स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि नल-जल योजना केवल संरचना का निर्माण नहीं है, बल्कि इसका नियमित संचालन और रख रखाव ही योजना की सफलता का आधार है । इस मौके पर वाटरएड जिला समन्वयक सुनील पाल ने जल संरक्षण, रिसाव रोकने के उपाय और जल स्रोतों के पुनर्भरण के महत्व को समझाया । इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की बर्बादी रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया ।

वाटरएड इंडिया के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को तकनीकी और प्रबंधकीय दोनों तरह की क्षमता प्रदान करना है, ताकि वे अपने ग्रामों में सुरक्षित और स्थायी पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित कर सकें । उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन जैसे अभियानों की सफलता तभी संभव है, जब स्थानीय स्तर पर समुदाय और पंचायत दोनों इसकी जिम्मेदारी निभाएं ।
प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताया और आश्वासन दिया कि वे सीखी गई बातों को अपने-अपने ग्राम पंचायतों में लागू करेंगे । वाटरएड इंडिया ने भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से पंचायतों को सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई । इस अवसर पर प्रशिक्षण में सुनील पाल जिला समन्वयक, स्वेता सोनाने, कविता वैष्णोई, विक्रम राठौर एवं बलवान सिंह मालवीय उपस्थित रहे।














