फंदा ब्लॉक के 20 ग्रामों की 40 महिलायें कृषक एचडीएफसी बैंक परिवर्तन के सहयोग से संचालित होलिस्टिक रूरल डेवलपमेंट प्रोग्राम (HRDP) और अर्पण सेवा संस्थान के माध्यम से बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं।
पहले तुरई, करेला, खीरा, सेम जैसी बेल फसलें ज़मीन पर फैलकर खराब हो जाती थीं, लेकिन अब महिलाओं ने मांडप और बांस-तार जालियों से इन्हें ऊपर उगाना शुरू किया है। इससे फसलों को बेहतर हवा, रोशनी और देखभाल मिल रही है।
महिलाओं ने रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया है। वे जैविक चटनी, पंचपत्ती काढ़ा, वर्मी वॉश और निमास्टर जैसे देसी घोलों से फसलों की देखभाल कर रही हैं। परिणामस्वरूप उत्पादन बढ़ा है, लागत घटी है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ है।
आज ये 40 महिला कृषक 10 से 12 बार फसल कटाई कर चुकी हैं और प्रत्येक को रु. 40,000 से रु. 42,000 तक की आमदनी हुई है। यह पहल महिलाओं के नेतृत्व में सुरक्षित खाद्य, टिकाऊ कृषि और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।















