भोपाल….
मप्र हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों में गड़बड़ियों को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) को सभी कॉलेजों की जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में यह सुनिश्चित करना होगा कि कॉलेजों में केवल पैरामेडिकल कोर्स ही चलें। परिसर में कोई अन्य शैक्षणिक संस्थान न हो।
क्यूसीआई को कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया, बुनियादी सुविधाएं, प्रयोगशालाएं, शिक्षक और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता की जांच करनी है। दरअसल, मामला मप्र पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा 14 जुलाई 2025 को 166 संस्थानों को 2023-24 सत्र के लिए पहले के सत्रों की मान्यता देने से शुरू हुआ।
हाईकोर्ट ने इस कदम को तर्कहीन और असामान्य बताया। सवाल उठाया कि 2025 में दी गई मान्यता के आधार पर 2023-24 में कोर्स कैसे चल सकते हैं? कई कॉलेजों ने बिना मान्यता या अपर्याप्त सुविधाओं के बावजूद छात्रों को प्रवेश दिया।
कुछ कॉलेजों को सीबीआई ने नर्सिंग कॉलेज घोटाले में अयोग्य पाया था, फिर भी उन्हें पैरामेडिकल कोर्स की मान्यता दी गई। लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन और अन्य पक्षों ने इस पर आपत्ति जताई। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि बिना मान्यता और बुनियादी ढांचे के कॉलेजों में दाखिला देकर छात्रों का भविष्य खतरे में डाला गया।
हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। मामले में अगली सुनवाई 12 अगस्त 2025 को होगी। बता दें कि इस पूरे मामले का असर करीब 40 हजार छात्रों पर पड़ा है। 16 जुलाई के आदेश के बाद प्रवेश प्रक्रिया रुक गई। 2022-23 और 2023-24 में दाखिला लेने वाले छात्रों की डिग्री की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों ने मोटी फीस दी, अब वे मानसिक और आर्थिक तनाव में हैं।
कब क्या हुआ….
– 16 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 2023-24 और 2024-25 सत्रों के लिए मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि पूर्वव्यापी मान्यता सामान्य बुद्धि के खिलाफ है। मप्र सरकार और पैरामेडिकल काउंसिल से जवाब मांगा गया कि मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती गई।
– 1 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। इससे प्रवेश प्रक्रिया फिर शुरू हो सकी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की वैधता पर सवाल उठाया और हाईकोर्ट के आदेश को सख्त बताया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट की सुनवाई और क्यूसीआई की जांच जारी रहेगी।
– 8 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल काउंसिल को सभी कॉलेजों की मान्यता से जुड़े दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया। क्यूसीआई को जांच में यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कॉलेजों में केवल पैरामेडिकल कोर्स ही संचालित हों।














