भोपाल….
- मध्यप्रदेश प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय छात्रों के साथ अन्यायपूर्ण था।
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उल्लेखनीय है कि राज्य नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने वर्ष 2024 के प्रवेश नियमों में यह प्रावधान जोड़ा था कि जीएनएम कोर्स में केवल वही विद्यार्थी प्रवेश ले सकेंगे, जिन्होंने 12वीं में बायोलॉजी विषय लिया हो। इस निर्णय के कारण आर्ट्स और कॉमर्स संकाय के विद्यार्थी नर्सिंग जैसे रोजगारोन्मुख कोर्स से वंचित हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसे शिक्षा के अधिकार और समान अवसर के सिद्धांतों के खिलाफ बताया।
- 58120_2025_1_41_65035_Order_14-Oct-2025
- सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में जीएनएम, एएनएम, पोस्ट बेसिक और एमएससी नर्सिंग कोर्सों में प्रवेश परीक्षा की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया है। यानी अब प्रवेश प्रक्रिया आईएनसी द्वारा निर्धारित सामान्य योग्यता के आधार पर ही होगी।
हेल्थ फेसिलिटी का स्तर भी सुधरेगा…. मध्यप्रदेश प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. प्रणीत जैन
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रणीत जैन ने बताया कि इस फैसले से खासतौर पर आदिवासी और ग्रामीण अंचलों के छात्रों को बड़ा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि अब अधिक से अधिक छात्र GNM और ANM जैसे रोजगारोन्मुख कोर्स में प्रवेश ले सकेंगे, जिससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर भी सुधरेगा। अदालत ने साथ ही GNM, ANM, पोस्ट बेसिक और MSc नर्सिंग कोर्सों में प्रवेश परीक्षा की बाध्यता भी खत्म कर दी है। इससे अब विद्यार्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया और आसान हो गई है।














