भोपाल….
मध्यप्रदेश में प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं में नकल, पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अन्य अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए चार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन किया गया है।
इन अदालतों में ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई की जाएगी। व्यवस्था के तहत चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए राज्य शासन ने विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की है, जबकि संबंधित जिलों में पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए हैं।

एमपी पहला राज्य होगा जहां यह व्यवस्था
भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में स्थापित की जाने वाली इन अदालतों का अधिकार क्षेत्र अलग-अलग निर्धारित किया गया है।
विशेष अभियोजक अदालत में साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने, गवाहों के समुचित प्रबंधन और न्यायालयीन पैरवी पर ध्यान देंगे। इसका उद्देश्य मामलों की सुनवाई व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना है।
पेपर लीक, नकल और परीक्षा से जुड़े अन्य अपराधों में प्रभावी अभियोजन के जरिए दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस तरह की व्यवस्था शुरू करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है।

विशेष अभियोजक करेंगे पैरवी, SIT करेगी जांच
राज्य शासन ने फास्ट ट्रैक अदालतों में मामलों की पैरवी के लिए विशेष अभियोजकों की नियुक्ति की है। ये अभियोजक साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से अदालत के सामने रखने, गवाहों के प्रबंधन और सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की तैयारी पर ध्यान देंगे।
वहीं, संबंधित जिलों में पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में गठित SIT परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच करेगी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले का ट्रायल तीन महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे पेपर लीक और नकल के मामलों में सुनवाई को गति देने और दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।












