भोपाल…
मप्र में शैक्षणिक सत्र 2027-28 से निजी कॉलेज खोलना आसान नहीं होगा। उच्च शिक्षा विभाग की नई गाइडलाइन के मुताबिक शहरों में कम से कम 2 एकड़, गांवों में 4 एकड़ विवादमुक्त जमीन जरूरी होगी। किराए के भवन में कॉलेज अधिकतम 5 साल चल सकेंगे। फर्जी दस्तावेज या गलत जानकारी देने पर मान्यता रद्द होगी और प्रबंधन पर 5 लाख रुपए तक जुर्माना लग सकेगा।
पहले से चल रहे कॉलेजों में नए विषय शुरू करने, शिक्षकों के वेतन व छात्रों के प्रवेश पर भी निगरानी बढ़ेगी। अब कॉलेजों को शिक्षकों के वेतन भुगतान के बैंक रिकॉर्ड देने होंगे। कॉलेज परिसर की ऐसी फोटो जमा करनी होगी, जिसमें स्थान की जानकारी दर्ज हो।
10 हजार वर्गफीट भवन में सिर्फ 2 संकाय….
कॉलेज के लिए कम से कम 15 हजार वर्गफीट परिसर और 10 हजार वर्गफीट निर्मित भवन जरूरी होगा। इसमें 2 स्नातक संकाय चल सकेंगे। हर अतिरिक्त स्नातक संकाय के लिए 3 हजार और प्रत्येक पीजी कोर्स के लिए 1 हजार वर्गफीट अतिरिक्त भवन चाहिए।
खेल मैदान, लाइब्रेरी और लैब भी जरूरी होंगे। शहर में जमीन नहीं मिलने पर निकाय सीमा से 5 किमी के भीतर 4 एकड़ जमीन दिखानी होगी।
बिना अनुमति प्रवेश पर फीस जब्त होगी….
कॉलेजों को सरकारी अनापत्ति प्रमाणपत्र और विश्वविद्यालय से संबद्धता मिलने के बाद ही ऑनलाइन प्रवेश की अनुमति मिलेगी। अनुमति के एक महीने में किताबों, लैब उपकरणों और स्टाफ की जानकारी देनी होगी। निर्धारित शुल्क जमा होने पर ही पोर्टल पर विषय दिखेंगे। बिना अनुमति प्रवेश देने पर फीस जब्त होगी और कॉलेज ब्लैकलिस्ट होगा। कॉलेज केवल स्वीकृत फीस ही ले सकेंगे।
नाम में इंडियन, नेशनल या जातिसूचक शब्द नहीं….
कॉलेज अपने नाम में इंडियन, नेशनल, भारतीय, राष्ट्रीय या किसी जाति विशेष का नाम नहीं जोड़ सकेंगे। 6 साल से अधिक पुराने निजी कॉलेजों को अगले 2 सत्रों में नैक से मान्यता संबंधी मूल्यांकन कराना होगा।












