20 अगस्त को पांच दिवसीय प्रशिक्षण का होगा समापन…. वैज्ञानिक, प्रोफेसर, रिसर्च स्कॉलर व अधिकारी होंगे शामिल
जावर (सुरेश मालवीय)….
गांवों में उपलब्ध संसाधनों को समस्या नहीं, बल्कि संभावित अवसर के रूप में देखने की वैज्ञानिक सोच के साथ पिपलिया सलारसी ग्राम पंचायत में चल रहे पांच दिवसीय प्रशिक्षण के तीसरे और चौथे दिन महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं फील्ड प्रशिक्षण आयोजित किया गया। 18 अगस्त को खेजड़ाखेड़ा में ब्रिकेटिंग एवं प्लास्टिक प्रबंधन, जबकि 19 अगस्त को गुराड़िया मंडा में नदी संरक्षण पर गतिविधियां कराई गईं।
एमपी काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (MPCST) के सहयोग से मां हिंगलाज सेवा समिति द्वारा आयोजित इस प्रशिक्षण में वैज्ञानिक, पर्यावरणविद् एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार मालवीय लगातार युवाओं को यह समझा रहे हैं कि विज्ञान और तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब उसे स्थानीय संसाधनों, स्थानीय जरूरतों और रोजगार की संभावनाओं से जोड़ा जाए।
तीसरे दिन खेजड़ाखेड़ा में ब्रिकेटिंग और प्लास्टिक प्रबंधन पर जोर
प्रशिक्षण के तीसरे दिन 18 अगस्त को खेजड़ाखेड़ा में कृषि अवशेषों के उपयोग और प्लास्टिक प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। डॉ. राजकुमार मालवीय ने ग्रामीणों और युवाओं को बताया कि खेतों से निकलने वाले सूखे कृषि अवशेषों को खुले में जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से उपयोगी उत्पाद में बदला जा सकता है।
ब्रिकेटिंग की प्रक्रिया के माध्यम से कृषि अवशेषों को वैकल्पिक ईंधन के रूप में उपयोग करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसके साथ ही प्लास्टिक कचरे के उचित संग्रहण, पृथक्करण, प्रबंधन और पर्यावरण पर उसके प्रभाव को कम करने के उपायों की जानकारी दी गई।
डॉ. मालवीय ने जोर दिया कि किसी भी तकनीक को अपनाने से पहले गांव में उपलब्ध कच्चे माल, उत्पादन लागत, ऊर्जा, तकनीकी क्षमता, तैयार उत्पाद की गुणवत्ता और बाजार की मांग का आकलन जरूरी है। यही प्रक्रिया किसी सामान्य गतिविधि को टिकाऊ ग्रामीण उद्यम और रोजगार के अवसर में बदल सकती है।

चौथे दिन गुराड़िया मंडा में नदी संरक्षण बना केंद्र बिंदु….
प्रशिक्षण के चौथे दिन 19 अगस्त को गुराड़िया मंडा में नदी संरक्षण से संबंधित फील्ड गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रशिक्षण में दूधी नदी बेसिन और स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को ध्यान में रखते हुए नदी संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर चर्चा की गई।
डॉ. राजकुमार मालवीय ने बताया कि नदी संरक्षण केवल नदी के किनारे सफाई करने तक सीमित विषय नहीं है। इसके लिए गांवों में निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, जल स्रोतों पर दबाव कम करना, जागरूकता बढ़ाना और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। यदि गांव अपने प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल का बेहतर उपयोग करें, तो स्वच्छता, पर्यावरण और रोजगार—तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
20 अगस्त को होगा विशेष समापन सत्र….
पांच दिवसीय प्रशिक्षण का समापन कार्यक्रम गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को पिपलिया सलारसी ग्राम पंचायत के पंचायत भवन में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर पिपलिया सलारसी, बादा गुराड़िया, खेजड़ाखेड़ा और गुराड़िया मंडा सहित संबंधित क्षेत्रों से प्रशिक्षणार्थियों की सहभागिता रहेगी।
20 अगस्त का कार्यक्रम केवल औपचारिक समापन नहीं, बल्कि विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण और ग्रामीण विकास पर विशेष संवाद का अवसर होगा। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, प्रोफेसर, रिसर्च स्कॉलर एवं अधिकारीगण सम्मिलित होंगे। इस दौरान प्रशिक्षण के प्रमुख विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें ग्रामीण युवाओं और प्रतिभागियों को तकनीक आधारित स्थानीय समाधान, अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रम में प्रशिक्षण के दौरान की गई गतिविधियों की प्रस्तुति, प्रमुख सीख और फील्ड अनुभव साझा किए जाएंगे। इसके बाद प्रशिक्षणार्थियों का मूल्यांकन तथा प्रमाण-पत्र वितरण भी किया जाएगा।
युवाओं और ग्रामीणों के लिए खुला आमंत्रण….
आयोजकों की ओर से क्षेत्र के युवाओं, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण के प्रति रुचि रखने वाले लोगों को 20 अगस्त के समापन सत्र में भागीदारी हेतु आमंत्रित किया है।















