जबलपुर….
बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा मामले में हाई कोर्ट की जबलपुर डिविजन बेंच ने 2,395 प्रभावित छात्रों को बड़ी राहत दी है।जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की पीठ ने लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अनसूटेबल कॉलेजों से सूटेबल कॉलेजों में ट्रांसफर हुए छात्रों को आगामी परीक्षाओं में शामिल होने और उनके रुके हुए परिणाम जारी करने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने कोर्ट को बताया कि ट्रांसफर के लिए पात्र 4,475 पंजीकृत छात्रों में से 2,813 ने प्रक्रिया में हिस्सा लिया, जिनमें से 2,395 छात्रों का सफलतापूर्वक स्थानांतरण किया जा चुका है। अदालत ने इस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लेते हुए छात्रों के हित में यह फैसला सुनाया। युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि जांच के बाद सूटेबल घोषित किए गए कॉलेज ही संचालन और परीक्षा के अधिकारी होंगे। हालांकि, कोर्ट ने आवेदनकर्ताओं को स्वतंत्रता दी है कि वे चाहें तो सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरण में आवेदन पेश कर सकते हैं।
ग्वालियर-चंबल के कॉलेजों के छात्रों को राहत नहीं….
ग्वालियर और चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों ने आवेदन पेश कर बताया कि उनके कॉलेजों की जांच वर्ष 2021 में ग्वालियर बेंच द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति कर चुकी है। समिति ने इन कॉलेजों को उपयुक्त पाया था। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने इन संस्थानों की सीबीआई जांच पर अस्थायी रूप से रोक लगाई थी।
छात्रों ने इसी आधार पर मांग की कि सीबीआई जांच पर रोक होने के कारण उनके कॉलेजों को सूटेबल मानते हुए उन्हें भी पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए और परीक्षा परिणाम जारी किए जाएं।
याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ग्वालियर-चंबल के इन कॉलेजों की जांच करने वाली 10 सदस्यीय समिति ने फैकल्टी डुप्लीकेसी की जांच नहीं की थी। आरोप है कि इन कॉलेजों ने संबंधित सत्रों में फर्जी और डुप्लीकेट फैकल्टी दर्शाकर मान्यता हासिल की थी। यह मामला जबलपुर बेंच में लंबित नर्सिंग फर्जीवाड़े की सुनवाई के दौरान भी कोर्ट के संज्ञान में लाया गया था।
इसी आधार पर याचिकाकर्ता और सरकार ने कहा कि सीबीआई जांच पूरी हुए बिना इन कॉलेजों को कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के इन कॉलेजों के संबंध में राहत देने से इनकार कर दिया।















