भोपाल….
मनेरगा का नाम बदलकर वीबी रामजी योजना कर दिया गया है, जो 1 जुलाई से प्रदेशभर में लागू होगी। योजना में पारदर्शिता के लिए फेस ऑथेंटिकेशन और एनएमएमएस ऐप आधारित उपस्थिति व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत मजदूरों की हाजिरी कार्यस्थल पर पहुंचने के बाद चेहरे के सत्यापन से दर्ज की जानी है।
लेकिन व्यवस्था लागू होने से पहले ही एप का क्लोन तैयार कर फर्जी हाजिरी लगाने का मामला सामने आया है। मुरैना जिले की खड़गपुर ग्राम पंचायत में जांच के दौरान पता चला कि कई ऐसे मजदूरों की भी उपस्थिति दर्ज की गई, जो कभी काम पर नहीं गए। इतना ही नहीं, एक मजदूर के नाम पर अलग-अलग दिनों में कई लोगों की तस्वीरें अपलोड कर दी गई । कलेक्टर ने कार्रवाई के निर्देश दिए और इसकी जानकारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजी गई।
पहले से खींची गई फोटो दर्ज करने का विकल्प नहीं….
• जियो-टैगिंग – जब भी किसी कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति ली जाती है, तो एप मोबाइल के जीपीएस का उपयोग करके उस स्थान को रिकॉर्ड करता है। इससे सुनिश्चित होता है कि उपस्थिति वास्तविक कार्यस्थल से ही ली जा रही है। • फेस ऑथेंटिकेशन और लाइव फोटो – एप के माध्यम से कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों की लाइव फोटो खींची जाती है। सुरक्षा मानकों के अनुसार, इसमें पहले से खींची गई या गैलरी से चुनी गई फोटो अपलोड करने का विकल्प नहीं होता।
और भी जिलों में इस तरह के मामलों की आशंका….
जांच में यह बात सामने आई है कि यह मामला सिर्फ मुरैना तक सीमित नहीं है। साइबर अपराधियों ने इस नकली सॉफ्टवेयर की फाइल और लिंक को ऑनलाइन बेचना शुरू कर दिया है। प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी इसी नकली एप के दम पर महीनों से फर्जी हाजिरी लगाई जा रही थी।
ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा….
असली एप में नियम है कि मजदूर को काम की जगह पर खड़े होकर ही अपनी लाइव फोटो खिंचवानी होगी। लेकिन इस नकली एप के जरिए कोई भी व्यक्ति कहीं भी बैठकर, किसी की भी पुरानी फोटो अपलोड करके फर्जी हाजिरी लगा सकता है। अब प्रदेश के सभी जिलों में इस एप के जरिए हुई हाजिरी की जांच कराई जा रही है।















