भोपाल….
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) भोपाल से संबद्ध बीएड कॉलेजों की मान्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रिकॉर्ड में जिन पतों पर चार अलग-अलग कॉलेज संचालित बताए गए हैं, वहां कहीं निर्माणाधीन इमारत मिली, कहीं खेत और कहीं एक ही परिसर से दो-दो कॉलेज चलाने का दावा सामने आया। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने मामले की हाई लेवल जांच शुरू कर दी है।
शनिवार को जांच के दौरान टीम को एक और संदिग्ध कॉलेज मिला। टीम मान्यता प्राप्त जेवियर कॉलेज भी पहुंची, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज पते पर बीएड कॉलेज नहीं मिला। वहां बीएड क बजाय दूसरे कोर्स संचालित होते पाए गए। टीम को जानकारी मिली कि बीएड की कक्षाएं किसी अन्य स्थान से संचालित की जा रही हैं।
इसके बाद टीम ने वहां भी दस्तावेजों का सत्यापन किया और मौके के साक्ष्य जुटाए। एनसीटीई की जांच के दायरे में कमलनाथ कॉलेज, जवाहर कॉलेज, श्रीराम कॉलेज व बगलामुखी कॉलेज शामिल हैं।
जियो टैग्ड फोटो, वीडियोग्राफी से जुटाए साक्ष्य….
प्रो. एच.सी.एस. राठौर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति ने शुक्रवार से संबंधित कॉलेजों का औचक निरीक्षण शुरू किया था। टीम ने कॉलेजों के दस्तावेजों का मिलान करने के साथ मौके का भौतिक सत्यापन किया। पूरे निरीक्षण की जियोटैग्ड फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि रिपोर्ट के साथ तथ्यात्मक साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जा सकें। समिति को पांच कार्यदिवस में रिपोर्ट सौंपनी है।
इस पते से हर साल 150 छात्र पास हो रहे थे….
रिकॉर्ड में जिस पते पर श्रीराम कॉलेज दर्ज है, वहां आसपास निर्माणाधीन इमारत, दूसरे संस्थान का बोर्ड और प्लॉट पर खेत जैसी स्थिति मिली। रिकॉर्ड बताते हैं कि करीब एक दशक से इस पते से हर साल 150 छात्र पास हो रहे थे। इनमें 100 बीएड और 50 बीएससी-बीएड के।
बीयू से पूछा- क्या कार्रवाई की?
एनसीटीई की टीम शनिवार को लंबे समय तक बीयू परिसर में रही। समिति ने अधिकारियों से संबंधित कॉलेजों की संबद्धता, निरीक्षण रिपोर्ट, रिकॉर्ड और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली। टीम ने यह भी पूछा कि शिकायतें मिलने के बाद संबंधित कॉलेजों के खिलाफ क्या कदम उठाए।
श्रीराम कॉलेज की संबद्धता खत्म….
बीयू के रजिस्ट्रार एसबी सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद विवि ने मामले का संज्ञान लिया था। श्रीराम कॉलेज को 17 मार्च, 10 अप्रैल और 28 अप्रैल को नोटिस जारी किए गए। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्यपरिषद की मंजूरी के बाद कॉलेज की संबद्धता समाप्त कर दी गई।















