भोपाल….
मप्र सरकार की प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का ड्राफ्ट मंजूरी के लिए रविवार को जगदीशपुर (पुराना इस्लामनगर) में होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। मसौदे में पारिवारिक कानूनों से जुड़े कई बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।
सबसे अहम यह कि कानून से ‘अवैध संतान’ शब्द हटा दिया जाएगा। विवाह, लिव-इन, गोद लेने, सरोगेसी और एआरटी (टेस्ट ट्यूब बेबी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा। ड्राफ्ट में पत्नी को भी विवाह निरस्त कराने का अधिकार दिया गया है।
अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों को देखते हुए इसके दायरे से बाहर रखा गया है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा।
विवाह और तलाक….
1. सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह मान्य होगा। बहुविवाह पर रोक।
2. शादी और तलाक, दोनों का पंजीयन अनिवार्य होगा। उद्देश्य फर्जी विवाह, बहुविवाह और भविष्य के कानूनी विवादों को रोकना है।
3. पंजीयन नहीं होने पर भी विवाह वैध रहेगा। केवल रजिस्ट्रेशन न होने के आधार पर शादी को अमान्य नहीं माना जाएगा।
4. रजिस्ट्रार आवेदन खारिज करेगा तो लिखित कारण बताना होगा। बिना उचित कारण आवेदन रोकने या अस्वीकार करने पर कार्रवाई-जुर्माने का प्रावधान। फैसले के खिलाफ अपील कर सकेंगे।
5. मौखिक तलाक, सामाजिक पंचायत या गैर-कानूनी व्यवस्था से विवाह खत्म नहीं होंगे।
6. यदि पति विवाह के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती कर चुका था, तो पत्नी भी अदालत में विवाह निरस्त कराने की याचिका दायर कर सकेगी। पहले यह अधिकार केवल पति को था।
7. तलाकशुदा दंपती के दोबारा विवाह के लिए निकाह हलाला जैसी अपमानजनक शर्त थोपना या उसके लिए मजबूर करना दंडनीय अपराध होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप….
1. लिव-इन में साथ रहने के एक महीने के भीतर पंजीयन कराना होगा। ऐसा न करने पर 3 महीने तक की जेल, 10,000 रु. तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
2. रजिस्ट्रेशन में गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने पर 3 महीने तक की जेल व 25,000 रु. तक जुर्माने का प्रावधान है। रजिस्ट्रार के नोटिस के बाद भी बयान जमा नहीं करने पर 6 महीने तक की जेल और 25,000 रु. तक जुर्माना हो सकता है।
3. संबंध टूटने पर महिला पार्टनर को भी पत्नी की तरह भरण-पोषण मांगने का अधिकार होगा।
4. लिव-इन के लिए दोनों पार्टनर की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होगी। पहले से शादीशुदा व्यक्ति या किसी अन्य पंजीकृत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाला व्यक्ति नया पंजीयन नहीं करा सकेगा।
5. किसी भी पार्टनर की उम्र 21 वर्ष से कम है, तो सूचना माता-पिता या अभिभावक को देंगे।
6. लिव-इन का पंजीयन होते ही रजिस्ट्रार इसकी सूचना संबंधित थाना प्रभारी को भी भेजेगा। यह रिकॉर्ड का हिस्सा होगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई में उपयोग की जा सकेगी।
उत्तराधिकार और वसीयत….
1. अब व्यक्ति अपनी पूरी संपत्ति, जिसमें पैतृक संपत्ति में उसका हिस्सा भी है, अपनी इच्छा से किसी भी व्यक्ति के नाम वसीयत कर सकेगा। पहले पैतृक हिस्से को लेकर अलग-अलग प्रावधान थे।
2. मृत संतान की संपत्ति में अब माता और पिता दोनों प्रथम श्रेणी के उत्तराधिकारी होंगे। दोनों को बराबर का कानूनी अधिकार मिलेगा।
3. जिस व्यक्ति की संपत्ति मिलनी थी, उसकी हत्या करने या हत्या में सहयोग करने वाला व्यक्ति उत्तराधिकार का हक खो देगा।















